शुक्रवार, 31 दिसंबर 2021

HAPPY NEW YEAR 2022



 नए साल पर सबके घर में खुशियों के रंग भर जाएं,


पुरानी मुसीबतें हो जाएं सबकी जिंदगी से दूर


सब लोग रहें खुश और उनकी इच्छाएं हो जाएं पूरी


बीमारियां हों दूर, कोरोना वायरस का भी हो खात्मा


आप सबको नववर्ष 2022 की ढेरों  शुभकामनाएं

जय श्री राम 

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बुधवार, 29 दिसंबर 2021

What is "Net Zero By 2050" Policy IEA


अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency’s- IEA) द्वारा शुद्ध शून्य उत्सर्जन (Net Zero Emissions - NZE) हेतु 'नेट ज़ीरो बाय 2050' (Net Zero by 2050) नाम से अपना रोडमैप जारी किया गया है।

यह विश्व का पहला व्यापक ऊर्जा रोडमैप है जिसे नवंबर 2021 में जलवायु परिवर्तन पर स्कॉटलैंड के ग्लासगो में संपन्न होने वाले संयुक्त राष्ट्र के कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ कोप-26 सम्मेलन में अपनाया जाएगा।

‘शुद्ध शून्य उत्सर्जन' का तात्पर्य उत्पादित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और वातावरण से निकाले गए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के मध्य एक समग्र संतुलन स्थापित करना है।

 आवश्यकता:

यदि अभी भी देशों द्वारा जलवायु संबंधी  प्रतिबद्धताओं जिसमें वर्ष 2050 तक कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन को ‘शुद्ध शून्य उत्सर्जन' तक लाना तथा वैश्विक तापन को 1.5 °C तक सीमित करना शामिल है को पूरी तरह से हासिल कर लिया जाए तो उसके बाद भी वे वैश्विक ऊर्जा लक्ष्य को प्राप्त करने से काफी पीछे होगी ।

क्लाइमेट चेंज के लिए क्लोरो-फ्लोरो कॉर्बन, ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन जिम्मेदार है। 'नेट जीरो' जिसे कॉर्बन न्यूट्रैलिटी भी कहा जाता है, इसका मतलब यह नहीं है कि कोई देश ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बिल्कुल ही न करे यानी एकदम जीरो कर दे। इसका मतलब यह है कि कोई देश वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों का जितना उत्सर्जन कर रहा है, उतना ही उसे सोख और हटा भी रहा है यानी वातावरण में वह देश ग्रीन हाउस गैसों को न बढ़ा रहा हो। उदाहरण के तौर पर जंगलों और ग्रीन कवर को बढ़ाकर इन गैसों को सोखा जा सकता है और फ्यूचरिस्टिक टेक्नॉलजीज के जरिए इन गैसों को वातावरण से हटाया जा सकता है। इलेक्ट्रिक वीइकल, ग्रीन फ्यूल के इस्तेमाल, सोलर एनर्जी, इको-फ्रेंडली टेक्नॉलजीज के जरिए ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम किया जा सकता है। इस तरह यह भी संभव है कि किसी देश का उत्सर्जन जीरो से कम हो यानी वह जितना ग्रीन हाउस गैस वातावरण में छोड़ रहा है, उससे ज्यादा वह सोख और हटा रहा है। दुनिया में भूटान और सूरीनाम दो ऐसे देश हैं जिन्होंने 'नेट जीरो' उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल कर लिया है। भूटान को तो अक्सर कॉर्बन-नेगेटिव देश कहा जाता है क्योंकि वह ग्रीनहाउस गैसों का जितना उत्सर्जन करता है, उससे ज्यादा को वह सोख लेता है।


'नेट जीरो' उत्सर्जन के लिए लक्ष्य और भारत

अबतक 132 देशों ने 2050 से पहले तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। कुल वैश्विक उत्सर्जन में करीब 30 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले चीन ने भी इसके लिए 2060 का लक्ष्य रखा है, हालांकि अभी उसका रोडमैप ही स्पष्ट नहीं है। दूसरी तरफ तमाम दबावों को दरकिनार कर भारत नेट जीरो उत्सर्जन के लिए किसी भी तरह के कमिटमेंट से इनकार कर रहा है।

पर्यावरण सुरक्षा में भारत दुनिया के लिए पेश कर रहा नजीर

कई अध्ययन बताते हैं कि जी-20 देशों में भारत इकलौता ऐसा देश है जो तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के पेरिस अग्रीमेंट के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। यहां तक कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के ऐक्शन 'अपर्याप्त' हैं। साफ है कि भारत क्लाइमेट चेंज के मोर्चे पर तमाम दूसरे देशों के मुकाबले पहले से ही ज्यादा कर रहा है। अमेरिका और चीन के बाद भारत ग्रीन हाउस गैसों का दुनिया का तीसरा बड़ा उत्सर्जक देश है। लेकिन पर्यावरण सुरक्षा की मुहिम में भारत नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है। ग्रीन एनर्जी के लिए इंटरनैशनल सोलर अलायंस जैसी पहल हो या देश के सबसे बड़े एम्प्लॉयर भारतीय रेलवे और दो पहिया और चार पहिया वाहनों (e lectaric)को 2030 तक नेट-जीरो उत्सर्जक बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य, ये भारत की गंभीरता को बताते हैं।


सोमवार, 27 दिसंबर 2021

अखण्ड भारत

 चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं। 


*सम्राट शांतनु* ने विवाह किया एक *मछवारे की पुत्री सत्यवती* से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की।


सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए *भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा?*


महाभारत लिखने वाले *वेद व्यास भी मछवारन के बेटे थे*, पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो।


*विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे*, हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है।


*भीम ने वनवासी हिडिम्बा* से विवाह किया।


*श्रीकृष्ण दूध का व्यवसाय* करने वालों के परिवार से थे, 


उनके भाई *बलराम खेती करते थे*, हमेशा हल साथ रखते थे।


*यादव क्षत्रिय* रहे हैं, कई प्रान्तों पर शासन किया और श्रीकृषण सबके पूजनीय हैं, गीता जैसा ग्रन्थ विश्व को दिया।


*राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे*।


उनके पुत्र *लव कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल* में पढ़े जो *वनवासी थे और पहले डाकू* थे।


तो ये हो गयी वैदिक काल की बात, स्पष्ट है कोई किसी का शोषण नहीं करता था,सबको शिक्षा का अधिकार था, कोई भी पद तक पहुंच सकता था अपनी योग्यता के अनुसार।


*वर्ण सिर्फ काम के आधार पर थे वो बदले जा सकते थे*, जिसको आज इकोनॉमिक्स में डिवीज़न ऑफ़ लेबर कहते हैं वो ही।*


प्राचीन भारत की बात करें, तो भारत के सबसे बड़े जनपद मगध पर जिस *नन्द वंश का राज रहा वो जाति से नाई थे* । 


नन्द वंश की शुरुवात महापद्मनंद ने की थी जो की राजा नाई थे। बाद में वो राजा बन गए फिर उनके बेटे भी, *बाद में सभी क्षत्रिय ही कहलाये*।


उसके बाद *मौर्य वंश* का पूरे देश पर राज हुआ, जिसकी शुरुआत *चन्द्रगुप्त से हुई,जो कि एक मोर पालने वाले परिवार से थे* और एक *ब्राह्मण चाणक्य ने* उन्हें पूरे देश का सम्राट बनाया । 506 साल देश पर मौर्यों का राज रहा।


फिर *गुप्त वंश* का राज हुआ, जो कि *घोड़े का अस्तबल चलाते थे* और घोड़ों का व्यापार करते थे।140 साल देश पर गुप्ताओं का राज रहा।


केवल *पुष्यमित्र शुंग* के 36 साल के राज को छोड़ कर *92% समय प्राचीन काल में देश में शासन उन्ही का  रहा, जिन्हें आज दलित पिछड़ा कहते हैं तो शोषण कहां से हो गया*? यहां भी कोई शोषण वाली बात नहीं है।


फिर शुरू होता है मध्यकालीन भारत का समय जो सन 1100- 1750 तक है, इस दौरान अधिकतर समय, अधिकतर जगह मुस्लिम शासन रहा।


अंत में *मराठों* का उदय हुआ, बाजी राव पेशवा जो कि ब्राह्मण थे, ने *गाय चराने वाले गायकवाड़* को गुजरात का राजा बनाया, *चरवाहा जाति के होलकर* को मालवा का राजा बनाया।


*अहिल्या बाई होलकर* खुद मानकर की बेटी थी बहुत बड़ी शिवभक्त थी, इंदौर में राज चलाया ढेरों मंदिर गुरुकुल उन्होंने बनवाये। 


*मीरा बाई जो कि राजपूत थी, उनके गुरु एक चर्मकार रविदास थे* और *रविदास के गुरु ब्राह्मण रामानंद* थे|।


यहां भी शोषण वाली बात कहीं नहीं है।


*मुग़ल काल से देश में गंदगी शुरू हो गई* और यहां से *पर्दा प्रथा, गुलाम प्रथा, बाल विवाह* जैसी चीजें शुरू होती हैं।


*1800-1947 तक अंग्रेजो के शासन* रहा और यहीं से *जातिवाद* शुरू हुआ । जो उन्होंने फूट डालो और राज करो की नीति के तहत किया। 


अंग्रेज अधिकारी *निकोलस डार्क की किताब "कास्ट ऑफ़ माइंड"* में मिल जाएगा कि कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद, छुआछूत को बढ़ाया और कैसे स्वार्थी भारतीय नेताओं ने अपने स्वार्थ में इसका राजनीतिकरण किया।


इन हजारों सालों के इतिहास में *देश में कई विदेशी आये* जिन्होंने भारत की सामाजिक स्थिति पर किताबें लिखी हैं, जैसे कि *मेगास्थनीज* ने इंडिका लिखी, *फाहियान*,  *ह्यू सांग* और *अलबरूनी* जैसे कई। किसी ने भी नहीं लिखा की यहां किसी का शोषण होता था।

 जन्म आधारित जातीय व्यवस्था हिन्दुओ को कमजोर करने के लिए लाई गई थी।


इसलिए भारतीय होने पर गर्व करें और घृणा, द्वेष और भेदभाव के षड्यंत्र से ख़ुद भी बचें और औरों को भी बचाएं ।


  🚩🙏जय श्रीराम🙏🏹


श्री सत्य सनातन संस्कृति धर्म आर्य वर्त जम्बूद्वीप सनातनी संस्कृति की सदा ही जय हो 

 

 भारत माता की जय

 वन्दे गौ मातरम्

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बोध कथा(Story)

*((a realization story))*

* went to the worship of a house entrance *

* Panditji was getting the worship done.* * Panditji called everyone to attend the Havan. Havan material was kept in front of everyone. Panditji would recite the mantra and say, "Swaha"*

* People would take the havan material with a pinch and put it in the fire, the home owner was entrusted with the responsibility of pouring ghee into the fire as soon as he said Swaha.*

Every person would put some ingredients, in the apprehension that the material might get exhausted before the completion of the havan, the home owners were also pouring ghee drop by drop. There was also a fear in his mind that the ghee might not run out.*

* Mantras continued, Swaha continued and worship was completed, everyone had a lot of Havan material left.*

*"Ghee was used less than half."*

After the completion of the havan, Panditji said that whatever material is left with you people, put it in the fire. He also told the home owner that you should also put this ghee in the pool.

A lot of Havan material was thrown into the fire at once. All the ghee was also handed over to the fire. The whole house was filled with smoke. It became difficult to sit there, one by one everyone left the room.*

*Now it was not possible to go into the room until everything was burnt. Had to wait a long time, waiting for everything to be destroyed.*

* Every person present in that worship knew that whatever Havan material he has, he has to put it in the Havan Kund itself. But everyone kept it safe that in the end the material will be useful or it will not end?*

* That's what we do. This is * * our nature. We save a lot for the end.*

*Which in the end remains lying here in the form of real estate and bank balance.*

The worship of life is over and the havan material remains. We get so engrossed in saving that we forget that everything is in the hands of the Havan Kund, what to do by saving it. Afterwards it's only going to be smoke!!

*बोध कथा))* *एक गृह प्रवेश की पूजा में गया* *पंडित जी पूजा करवा रहे थे।* *पंडित जी ने सभी को हवन में सम्मिलित होने के लिए बुलाया। सबके सामने हवन सामग्री रखी गई। पंडित जी मंत्र पढ़ते और कहते, "स्वाहा"* *लोग चुटकी भर हवन सामग्री लेकर अग्नि में डालते, गृह स्वामी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि स्वाहा कहते ही अग्नि में घी डाल दे।* हर व्यक्ति कुछ सामग्री डालता, इस आशंका में कि कहीं हवन पूर्ण होने से पहले सामग्री समाप्त न हो जाए, गृह स्वामी भी बूंद-बूंद घी डाल रहे थे। उनके मन में यह भी भय था कि कहीं घी समाप्त न हो जाए।* *मंत्र चलते रहे, स्वाहा होते रहे और पूजा पूर्ण हो गई, सभी के पास काफी हवन सामग्री बच गई।* *"आधे से भी कम घी उपयोग हुआ था।"* हवन पूर्ण होने के बाद पंडित जी ने कहा कि आप लोगों के पास जो भी सामग्री बची है, उसे अग्नि में डाल दें। उन्होंने गृह स्वामी से यह भी कहा कि आप यह घी भी कुंड में डाल दें। बहुत सारी हवन सामग्री एक साथ अग्नि में डाल दी गई। सारा घी भी अग्नि के हवाले कर दिया गया। पूरा घर धुएं से भर गया। वहां बैठना मुश्किल हो गया, एक-एक करके सभी कमरे से बाहर निकल गए। अब जब तक सब कुछ जल न जाए, कमरे में जाना संभव नहीं था। काफी देर तक प्रतीक्षा करनी पड़ी, सब कुछ नष्ट होने का इंतजार करना पड़ा। उस पूजन में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति जानता था कि उसके पास जो भी हवन सामग्री है, उसे हवन कुंड में ही डालना है। लेकिन सभी ने यह सुरक्षित रखा कि अंत में सामग्री काम आएगी या समाप्त नहीं होगी? हम यही करते हैं। यह हमारा स्वभाव है। हम अंत के लिए बहुत कुछ बचाते हैं। जो अंत में अचल संपत्ति और बैंक बैलेंस के रूप में यहीं पड़ा रह जाता है। जीवन की पूजा समाप्त हो गई और हवन सामग्री रह गई। हम बचाने में इतने मशगूल हो जाते हैं कि भूल जाते हैं कि सब कुछ हवन कुंड के हाथ में है, उसे बचाकर क्या करना है। बाद में तो धुआं ही धुआं रह जाएगा!!



*"संसार" हवन कुंड है और "जीवन" पूजा।*

*एक दिन सब कुछ हवन कुंड में समाहित होना है ।*

*अच्छी पूजा वही है, जिसमें "हवन सामग्री का सही अनुपात में इस्तेमाल हो" न सामग्री खत्म हो ! न बची रह जाए !!*

*यही है लाइफ का मैनेजमेन्ट करना !!!*

*"सपनो के चक्कर में जीना भूल जाना अच्छा नहीं है.....*

After all, it doesn't matter how many breaths we took in life, but it matters how well we used those breaths.

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कानपुर मेट्रो के उदघाटन की तैयारिया

प्रधानमंत्री  मोदी कल यानी 28 दिसंबर  को कानपुर  में मेट्रो रेल का लोकार्पण (kanpur metro inauguration) करने के  पहले करीब 11 बजे आईआईटी कानपुर के 54वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे।


प्रधानमंत्री मोदी का प्रस्तावित कार्यक्रम (Narendra Modi Minute to Minute)

  • 10.25 बजे चकेरी एयरफोर्स स्टेशन पर उतरेंगे पर आएंगे।
  • 11 बजे आईआईटी के दीक्षांत समारोह में पहुंचेंगे।
  • 12.15 बजे आईआईटी आडिटोरियम से निकलेंगे।
  • 12.25 बजे मेट्रो स्टेशन आईआईटी में पहुंचकर प्रदर्शनी को देखेंगे।
  • 12.30 बजे तक आईआईटी स्टेशन से मेट्रो से गीता नगर जाएंगे।
  • 12.40 बजे गीता नगर मेट्रो स्टेशन पहुंचेंगे।
  •  12.50 बजे सीएसए विवि. हेलीपैड पर पहुंचेंगे।
  • 1.20 बजे  निराला नगर रेलवे मैदान पर पहुंचेंगे।
  • 1.30 बजे मैदान में बीपीसीएल की प्रदर्शनी को देखेंगे।
  • 1.45 बजे पीएम नरेंद्र मोदी मंच पर पहुंचेंगे।
  • 2.45 बजे पीएम निराला नगर मैदान से चकेरी एयरफोर्स स्टेशन रवाना् होंगे।
  • 3.20 बजे चकेरी एयरफोर्स स्टेशन से दिल्ली के लिए वापस होंगे।

रविवार, 26 दिसंबर 2021

Bit coin and crypto currency पर invevestment हो सकता है खतरनाक

एंटी वायरस सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी Norton का दावा है कि अगले वर्ष सायबर अटैक और क्रिप्टो स्कैम बढ़ सकते हैं।


  1. nortonने अगले वर्ष के लिए सायबर सिक्योरिटी से जुड़े पूर्वानुमान दिए है
  2. लॉगिन डिटेल्स चुराने के लिए फिशिंग कैम्पेन का इस्तेमाल हो सकता है
  3. अगलेवर्ष स्कैमर्स आपदाओं से पीड़ित लोगों को निशाना बनाना जारी रखेंगे

अगले वर्ष क्रिप्टोकरंसी मार्केट में नए इनवेस्टर्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने का अनुमान है और इस वजह से स्कैम भी अधिक हो सकते हैं। यूजर्स की लॉगिन डिटेल्स चुराने के लिए फिशिंग कैम्पेन या टेक सपोर्ट की आड़ में धोखाधड़ी करने के मामले भी बढ़ने की आशंका है।
Norton ने अगले वर्ष के लिए सायबर सिक्योरिटी से जुड़े कुछ पूर्वानुमान दिए हैं। इनमें क्रिप्टोकरंसी स्कैम में बढ़ोतरी सबसे ऊपर है। नए यूजर्स और काम जानकारी वाले यूजर्स सावधान रहे उठाना पड़ सकता है नुकसान ।

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